नई दिल्ली। महेंद्रसिंह धोनी की बायोपिक ‘एमएस धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी’ में कई खुलासे हो रहे हैं, लेकिन सबसे बड़ा खुलासा यह है कि 2011 विश्व कप फाइनल में श्रीलंका के खिलाफ युवराज से पहले बल्लेबाजी करने महेंद्रसिंह धोनी क्यों उतरे थे।
नीरज पांडे द्वारा निर्देशित यह फिल्म इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर धूम मचा रही है। फिल्म में खुलासा किया गया कि फाइनल में युवराज के पहले धोनी बल्लेबाजी के लिए क्यों उतरे थे। धोनी के बल्लेबाजी पर जाने के पहले कोच गैरी कर्स्टन और धोनी की बातचीत से इसका खुलासा होता है।
275 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत के दो दिग्गज वीरेंद्र सहवाग और सचिन तेंडुलकर जल्दी आउट हो गए थे। विराट कोहली और गौतम गंभीर अच्छी बल्लेबाजी कर रहे थे। 19वें ओवर में मुथैया मुरलीधरन को गेंदबाजी पर लगाया गया, जिसके चलते धोनी ने कोच कर्स्टन के पास जाकर कहा कि अगला विकेट गिरने के बाद वे बल्लेबाजी के लिए उतरेंगे।
मुरलीधरन और धोनी के बीच इस तरह हुई बात –
धोनी: एक्सक्यूज मी, गैरी। यदि अब विकेट हुआ तो मुझे बल्लेबाजी के लिए जाना चाहिए।
कर्स्टन: लेकिन युवी पैड पहनकर तैयार है।
धोनी: नहीं, मुरली गेंदबाजी कर रहा है, इसलिए मुझे ही उतरना चाहिए।
कर्स्टन: पक्का तुम उतरना चाहते हो?
धोनी: आप युवराज को बता दो, मैं बल्लेबाजी के लिए जाऊंगा।
वैसे धोनी फाइनल के पहले फॉर्म में नहीं थे और 8 मैचों में मात्र 150 रन बना पाए थे। युवराज टूर्नामेंट में 341 रन बनाने के अलावा महत्वपूर्ण विकेट हासिल कर चुके थे और बल्लेबाजी पर उतरने के लिए तैयार थे लेकिन कोहली का विकेट गिरने के बाद उनसे पहले धोनी क्रीज पर उतरे।
114 पर भारत का तीसरा विकेट गिरा और जीत के लिए 150 रन और चाहिए थे, ऐेसे में युवी से पहले धोनी क्रीज पर उतरे और उसके बाद तो इतिहास रचा गया। धोनी ने 79 गेंदों में 91 रन बनाए और भारत ने 28 वर्षों बाद विश्व कप जीता। धोनी ने छक्का लगाते हुए भारत को जीत दिलाई थी।
नीरज पांडे द्वारा निर्देशित यह फिल्म इन दिनों बॉक्स ऑफिस पर धूम मचा रही है। फिल्म में खुलासा किया गया कि फाइनल में युवराज के पहले धोनी बल्लेबाजी के लिए क्यों उतरे थे। धोनी के बल्लेबाजी पर जाने के पहले कोच गैरी कर्स्टन और धोनी की बातचीत से इसका खुलासा होता है।
275 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत के दो दिग्गज वीरेंद्र सहवाग और सचिन तेंडुलकर जल्दी आउट हो गए थे। विराट कोहली और गौतम गंभीर अच्छी बल्लेबाजी कर रहे थे। 19वें ओवर में मुथैया मुरलीधरन को गेंदबाजी पर लगाया गया, जिसके चलते धोनी ने कोच कर्स्टन के पास जाकर कहा कि अगला विकेट गिरने के बाद वे बल्लेबाजी के लिए उतरेंगे।
मुरलीधरन और धोनी के बीच इस तरह हुई बात –
धोनी: एक्सक्यूज मी, गैरी। यदि अब विकेट हुआ तो मुझे बल्लेबाजी के लिए जाना चाहिए।
कर्स्टन: लेकिन युवी पैड पहनकर तैयार है।
धोनी: नहीं, मुरली गेंदबाजी कर रहा है, इसलिए मुझे ही उतरना चाहिए।
कर्स्टन: पक्का तुम उतरना चाहते हो?
धोनी: आप युवराज को बता दो, मैं बल्लेबाजी के लिए जाऊंगा।
वैसे धोनी फाइनल के पहले फॉर्म में नहीं थे और 8 मैचों में मात्र 150 रन बना पाए थे। युवराज टूर्नामेंट में 341 रन बनाने के अलावा महत्वपूर्ण विकेट हासिल कर चुके थे और बल्लेबाजी पर उतरने के लिए तैयार थे लेकिन कोहली का विकेट गिरने के बाद उनसे पहले धोनी क्रीज पर उतरे।
114 पर भारत का तीसरा विकेट गिरा और जीत के लिए 150 रन और चाहिए थे, ऐेसे में युवी से पहले धोनी क्रीज पर उतरे और उसके बाद तो इतिहास रचा गया। धोनी ने 79 गेंदों में 91 रन बनाए और भारत ने 28 वर्षों बाद विश्व कप जीता। धोनी ने छक्का लगाते हुए भारत को जीत दिलाई थी।

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