लखनऊ। बाबा साहब भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय (बीबीएयू) के आठ दलित छात्रों का निष्कासित रद्द नहीं किये जाने के विरोध में आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति ने आगामी आठ अक्टूबर को लखनऊ में आरक्षण समर्थक राष्ट्रीय छात्र संसद’ बुलाई है।
इसमें बीबीएयू, हैदराबाद, जेएनयू, बीएचयू, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, लखनऊ विवि, वर्धा विश्वविद्यालय, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, टाटा इंस्टीट्यूट सहित देश के अन्य विश्वविद्यालय के आरक्षण समर्थक छात्र हिस्सा लेंगे। छात्र संसद में बीबीएयू प्रशासन के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान होगा। यह छात्र संसद देश में पहली आरक्षण समर्थक छात्र संसद होगी।
आरक्षण समर्थक करेंगे आर-पार की लड़ाई
समिति के संयोजक अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि बीबीएयू प्रशासन दलित छात्रों के निष्कासन के मामले पर खुद कठघरे में खड़ा हो गया है। जहां विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा गठित 8 सदस्यीय जांच समिति ने कुलपति को अपनी रिपोर्ट सौंपी और उसमें यह खुलासा किया कि सीधे तौर पर कोई भी छात्र दोषी नहीं है। इसकी बाह्य एजेन्सी से जांच कराया जाना उचित होगा।
ऐसे में इस रिपोर्ट के आधार पर निष्कासित छात्रों को स्वत: न्याय मिल जाना चाहिए था, लेकिन कुलपति ने इस रिपोर्ट को दबाकर प्रो. कमल जैसवाल के दबाव में जिस प्राक्टोरियल बोर्ड ने बिना जांच किए 8 दलित छात्रों का निष्कासन किया था। उसी से पुन: जांच कराकर अब 3 छात्रों का निष्कासन वापस किया गया। इससे सिद्ध हो रहा है कि प्राक्टोरियल बोर्ड स्वत: संदेह के घेरे में है।

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