भुवनेश्वर, पीटीआई। ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर के एक निजी अस्पताल में सोमवार रात भड़की आग में 23 लोगों की मौत हो गई। बड़ी संख्या में मरीज और तीमारदार झुलस गए हैं। आग पर काबू पा लिया गया है। माना जा रहा है कि आग चार मंजिले सम अस्पताल के प्रथम तल पर स्थिति डायलिसिस वार्ड में बिजली की शॉर्ट सर्किट से लगी। तेजी से फैली आग ने बगल में स्थित आइसीयू को भी चपेट में ले लिया।
जिस समय आग लगी, अस्पताल में करीब 500 मरीज मौजूद थे। स्वास्थ्य सचिव आरती आहुजा के मुताबिक फिलहाल स्पष्ट तौर पर कहा नहीं जा सकता है कि कितने लोगों की मौत हुई है। दूसरी ओर कैपिटल अस्पताल के अधीक्षक बिनोद कुमार मिश्रा ने बताया है कि उनके यहां लाए गए लोगों में नौ की पहले ही मौत हो चुकी थी।
जबकि पांच की हालत अत्यंत गंभीर है। आम्री अस्पताल के यूनिट हेड डॉ. सलिल कुमार मोहंती ने बताया है कि उनके यहां कैजुअलिटी वार्ड में 37 मरीज लाए गए थे। जिनमें आठ को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया है। आग की चपेट में आए लोगों में ज्यादातर आइसीयू के मरीज हैं।
पीएम ने एम्स भेजने को कहा
हादसे की खबर मिलने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से बात की और सभी जख्मी लोगों को एम्स में शिफ्ट कराने की व्यवस्था सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए। केंद्रीय मंत्री धर्मेद्र प्रधान से बात कर घायलों व अन्य प्रभावितों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। प्रधानमंत्री ने हादसे पर दुख व्यक्त करते हुए कहा है कि उनकी संवेदनाएं पीडि़त परिवारों के साथ है।
शॉर्ट सर्किट से लगी आग
अग्नि शमन विभाग के निदेशक बी. बेहरा ने बताया है कि आग पर काबू पाने के लिए तीन फायर स्टेशनों के कर्मचारियों और सात अग्निशमन गाडि़यों को लगाया गया था। पुलिस आयुक्त दफ्तर और अस्पताल के कर्मचारी आग पर काबू पाने में काफी मददगार साबित हुए। बेहरा ने बताया कि प्रथम दृष्टया लगता है कि आग शॉर्ट सर्किट से लगी। लेकिन वास्तविक कारण का पता विस्तृत जांच के बाद ही चल सकेगा। गंभीर हालत वाले मरीजों को दूसरे अस्पताल में शिफ्ट करने के लिए एक दर्जन से ज्यादा एंबुलेंस को लगाया गया।
जम्मू-कश्मीर: डोडा के जंगलों में लगी आग
खिड़कियां तोड़कर कूदे मरीज
एक प्रत्यक्षदर्शी के मुताबिक काफी संख्या में मरीज खिड़कियों के शीशे तोड़कर कूद गए और अपनी जान बचाई। ज्योति प्रकाश नामक शख्स के पिता अस्पताल में भर्ती हैं। ज्योति प्रकाश ने बताया-'मैंने पहली मंजिल से कूदकर अपनी जान बचाई। मेरे पिता के साथ क्या हुआ, मालूम नहीं। चारों तरफ धुआं के कारण कुछ पता नहीं चल पा रहा है।'
जिस समय आग लगी, अस्पताल में करीब 500 मरीज मौजूद थे। स्वास्थ्य सचिव आरती आहुजा के मुताबिक फिलहाल स्पष्ट तौर पर कहा नहीं जा सकता है कि कितने लोगों की मौत हुई है। दूसरी ओर कैपिटल अस्पताल के अधीक्षक बिनोद कुमार मिश्रा ने बताया है कि उनके यहां लाए गए लोगों में नौ की पहले ही मौत हो चुकी थी।
जबकि पांच की हालत अत्यंत गंभीर है। आम्री अस्पताल के यूनिट हेड डॉ. सलिल कुमार मोहंती ने बताया है कि उनके यहां कैजुअलिटी वार्ड में 37 मरीज लाए गए थे। जिनमें आठ को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया है। आग की चपेट में आए लोगों में ज्यादातर आइसीयू के मरीज हैं।
पीएम ने एम्स भेजने को कहा
हादसे की खबर मिलने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा से बात की और सभी जख्मी लोगों को एम्स में शिफ्ट कराने की व्यवस्था सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए। केंद्रीय मंत्री धर्मेद्र प्रधान से बात कर घायलों व अन्य प्रभावितों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। प्रधानमंत्री ने हादसे पर दुख व्यक्त करते हुए कहा है कि उनकी संवेदनाएं पीडि़त परिवारों के साथ है।
शॉर्ट सर्किट से लगी आग
अग्नि शमन विभाग के निदेशक बी. बेहरा ने बताया है कि आग पर काबू पाने के लिए तीन फायर स्टेशनों के कर्मचारियों और सात अग्निशमन गाडि़यों को लगाया गया था। पुलिस आयुक्त दफ्तर और अस्पताल के कर्मचारी आग पर काबू पाने में काफी मददगार साबित हुए। बेहरा ने बताया कि प्रथम दृष्टया लगता है कि आग शॉर्ट सर्किट से लगी। लेकिन वास्तविक कारण का पता विस्तृत जांच के बाद ही चल सकेगा। गंभीर हालत वाले मरीजों को दूसरे अस्पताल में शिफ्ट करने के लिए एक दर्जन से ज्यादा एंबुलेंस को लगाया गया।
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खिड़कियां तोड़कर कूदे मरीज
एक प्रत्यक्षदर्शी के मुताबिक काफी संख्या में मरीज खिड़कियों के शीशे तोड़कर कूद गए और अपनी जान बचाई। ज्योति प्रकाश नामक शख्स के पिता अस्पताल में भर्ती हैं। ज्योति प्रकाश ने बताया-'मैंने पहली मंजिल से कूदकर अपनी जान बचाई। मेरे पिता के साथ क्या हुआ, मालूम नहीं। चारों तरफ धुआं के कारण कुछ पता नहीं चल पा रहा है।'

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