Friday, 7 October 2016

जब अखिलेश सीएम बन सकते हैं तो मैं क्यों नहीं

रालोद के राष्ट्रीय महासचिव जयंत चौधरी का मानना है कि उत्तर प्रदेश में अब गठबंधन की ही सरकार बनेगी। रालोद के साथ मिलकर एक नया सियासी मंच तैयार हो रहा है जो प्रदेश को अलग दिशा देगा। इस गठबंधन में सीएम कैंडीडेट कौन होगा, इस सवाल पर उनका कहना था कि जब अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बन सकते हैं तो वह क्यों नहीं।

जयंत चौधरी गुरुवार को पैदल यात्रा पर निकले। हरियाणा-यूपी बार्डर के कोटवन से गांव कांमर तक रोड शो हुआ फिर बठैनगेट तक पदयात्रा की गई। इस दौरान उन्होंने ‘अमर उजाला’ के साथ बातचीत में कहा कि अभी बड़ौत में किसान-मजदूर स्वाभिमान रैली में महागठबंधन की नींव रखी गई है।



यहां बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार, राज्यसभा सदस्य शरद यादव के साथ बीएस-4 के आरके चौधरी पहुंचे थे। कई मुद्दों पर सहमति बन गई है। इस महागठबंधन से जल्द ही कुछ दूसरे दल भी जुड़ेंगे। प्रदेश की सियासत में यह गठबंधन एक ताकत बनेगा। क्योंकि अगर समाज को बांटने वाली ताकतों को दूर रखना है तो साझा मंच बनाना ही पड़ेगा।

जब जयंत चौधरी से पूछा गया कि क्या यह गठबंधन मुख्यमंत्री के रूप में आपको प्रोजेक्ट करेगा तो बोले..अभी तो इन बिंदुओं पर कोई चर्चा ही नहीं हुई लेकिन जब अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बन सकते हैं तो वह क्यों नहीं। उनसे किसी मायने में कम तो हैं नहीं। जयंत चौधरी का कहना था कि प्रदेश की दशा और दिशा बदलने के लिए नौजवानों को सियासत में दखल देना होगा। क्योंकि नौजवान जानते हैं कि आम आदमी को क्या तकलीफ है। किस तरह से समस्याओं का निस्तारण किया जा सकता है।

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि विकास के लिए छोटे प्रदेशों का गठन बहुत जरूरी है। कानून व्यवस्था को भी सुधारा जा सकता है। रालोद तो हमेशा से ही छोटे राज्य की वकालत करती रही है।

खो-खो खेल रहे हैं अखिलेश और शिवपाल
जयंत चौधरी ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और उनके चाचा शिवपाल के बीच खो-खो का खेल हो रहा है। कभी चाचा जीत जाता है तो कभी भतीजा। इस खेल में ही सपा का सफाया हो जाएगा। प्रदेश पर तो किसी का ध्यान ही नहीं जा रहा। विकास ठप है। अपराध बढ़ रहे हैं। सपा के नेता लूटमार मचाए हैं। लेकिन सरकार को तो घर के झगड़ों से ही फुर्सत नहीं मिल रही।

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