Friday, 14 October 2016

ब्रिक्स: आतंकवाद पर पाक से नरमी दिखाने के लिए जिनपिंग से नाराजगी जताएंगे मोदी

पणजी. आतंकवाद पर पाकिस्तान के खिलाफ ब्रिक्स समिट में भारत का आक्रामक रवैया बरकरार रहने की उम्मीद है। गोवा में शनिवार से 8वीं ब्रिक्स समिट होगी। माना जा रहा है कि इस बैठक में नरेंद्र मोदी आतंकवाद पर चीन के रुख को लेकर प्रेसिडेंट शी जिनपिंग से नाराजगी जताएंगे। बता दें कि चीन ने हाल ही में आतंकी मसूद अजहर पर बैन लगाने का यूएन में विरोध किया था। अजहर वही आतंकी है, जिसे 17 साल पहले कंधार हाईजैक केस में यात्रियों की रिहाई के बदले छोड़ा गया था। पठानकोट एयरबेस और उड़ी आर्मी कैम्प पर हमले में मसूद के संगठन जैश-ए-मोहम्मद का ही हाथ था। एनएसजी पर भी होगी चर्चा…
- 15 और 16 अक्टूबर को गोवा में ब्रिक्स समिट हो रही है। माना जा रहा है कि समिट से पहले ही शनिवार को नरेंद्र मोदी चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सामने पाकिस्तान और आतंकवाद का मुद्दा उठाएंगे।


- हाल ही में चीन ने यूएन में मसूद अजहर को आतंकी करार देने की भारत की कोशिशों को झटका दिया था। 
- चीन का कहना है कि वह भारत के राजनीतिक फायदे के लिए ऐसी किसी भी कोशिश का सपोर्ट नहीं कर सकता।
- ब्रिक्स समिट के दौरान मोदी एनएसजी में भारत की मेंबरशिप का सपोर्ट करने पर भी जिनपिंग से बात कर सकते हैं।
- रूस भी उड़ी अटैक के बाद पाकिस्तान के साथ ज्वाइंट आर्मी ड्रिल कर चुका है। भारत ने इस पर भी नाराजगी जताई थी।
- भारत-पाक पार्टीशन के 69 सालों में रूस की पाकिस्तान के साथ यह पहली आर्मी ड्रिल थी।
भारत चाहता है ब्रिक्स मेंबर्स पाक का विरोध करें
- भारत चाहता है कि ब्रिक्स की बैठक में सभी पांचों मेंबर ब्राजील, रूस, इंडिया, चाइना, साउथ और अफ्रीका पाकिस्तान की ओर से हो रहे हमलों का विरोध करें।
- मोदी की यह भी कोशिश है कि इस बैठक के जरिए मंदी से जूझ रहे सभी मेंबर देशों का हौसला बढ़ाया जाए।
चीन अपने रुख पर कायम
- हालांकि, कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एनएसजी में भारत की दावेदारी और मसूद अजहर पर बैन के मसले पर चीन के रुख में कोई बदलाव नहीं आया है।
- इन रिपोर्ट्स में चीन की फॉरेन मिनिस्ट्री के हवाले से कहा गया है कि वह इन दोनों ही मसलों पर सहमति बनने तक भारत का विरोध जारी रखेंगे।
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चीन चाहता है फ्री ट्रेड एरिया
- चीन चाहता है कि गोवा में ब्रिक्स मेंबर्स कारोबार की दिक्कतों को दूर करने के लिए फ्री ट्रेड एरिया बनाने पर सहमति जताएं।
- चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने गुरुवार को ब्रिक्स देशों से यह अपील की।
- रिपोर्ट में कहा गया कि चीन बाकी चार मेंबर देशों के लिए अपना घरेलू बाजार खोलना चाहता है। लेकिन दूसरे देशों की ओर से अभी ऐसा कमिटमेंट नहीं आया है।
- चीन का कहना है कि वह फ्री ट्रेड के लिए ऑस्ट्रेलिया और साउथ कोरिया समेत कई देशों के साथ 14 एग्रीमेंट पर दस्तखत कर चुका है।
क्या है ब्रिक्स
- BRICS (ब्राजील, रूस, इंडिया, चाइना, साउथ अफ्रीका) देशों का एक ग्रुप है। यह 2011 में बना था।
- इस ग्रुप को बनाने का मकसद अपने इकॉनोमिक और पॉलिटिकल दबदबे से वेस्टर्न कंट्री के रुतबे को चुनौती देना है।
- इन पांचों देशों की जीडीपी 1600 हजार करोड़ रुपए है।
- ब्रिक्स ने वॉशिंगटन में मौजूद इंटरनेशनल मॉनिटरी फंड और वर्ल्ड बैंक के मुकाबले अपना खुद का बैंक बनाया है।
आगे की स्लाइड में पढ़ें : ब्रिक्स से जुड़े बड़े सवालों पर भास्कर एक्सपर्ट रहीस सिंह के जवाब...

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