#SurgicalStrike के बाद अब स्लीपर सेल की बारी
पीएम मोदी अब फिल्म के इस रोमांच को हकीकत में बदलने के मिशन में जुट गई है। #SurgicalStrike की तरह एलओसी पार आतंकियों पर हमले के बाद अब सीमा में घुसे आतंकियों के नेटवर्क को ध्वस्त करने का जिम्मा सरकार ने राष्ट्रीय राइफल्स की विक्टर फोर्स और किलो फोर्स को दिया है।
विक्टर फोर्स के जिम्मे अनंतनाग, पुलवामा और बडगाम आते हैं।और किलो फोर्स के जिम्मे कुपवाड़ा, बारामूला और श्रीनगर में आतंक विरोधी कार्रवाई की कमान है। किलो फोर्स के मुख्यालय पर ही रविवार देर रात आतंकी हमला हुआ था।
इन्हें कहते हैं स्लीपर सेल
आतंकियों का वो दस्ता जो आम लोगों के बीच रहता है और आतंकियों के हैंडलर्स से आदेश मिलने के बाद हरकत में आते हैं। लंबे समय तक आम जिंदगी जीने वाले इन लोगों को सरकार के लिए पकड़ना मुश्किल होता है। किसी मॉल-दुकान में काम करने वाले, छोटी-मोटी नौकरी-बिजनेस करने वाले ये स्लीपर सेल सूचनाएं जुटाने में माहिर होते हैं।
स्लीपर सेल जज्बाती होते हैं जो जान देने से भी नहीं चूकते। देश के बिगड़े माहौल में आतंकी इन्हीं स्लीपर सेल को एक्टिव करके नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते हैं।
इसे ख़त्म करने के लिए हुई बैठक
तीनों सेनाओं के प्रमुखों और रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर के साथ एनएसए अजीत डोभाल की हुई बैठक में इसी मुद्दे पर बात हुई। बाद में एनएसए अजीत डोभाल की पीएम मोदी से मुलाकात को भी इसी मुहिम से जोड़कर देखा जा रहा है।
हमले में स्थानीय लोगों ने की मदद
उरी में सेना के बेस कैंप पर हुए हमले में ये बात सामने आई थी कि आतंकी कई दिन से उस इलाके में थे जबकि बारामूला में आतंकी हमलों में भी स्थानीय मदद की बात सामने आई है। इसके बाद ही घाटी में आतंक विरोधी अभियानों को पूरी शिद्दत से शुरू करने और उसके ख़ात्मे के लिए एक बड़ा अभियान चलाए जाने का न सिर्फ़ खाका खींच दिया गया है बल्कि उसे शीर्ष स्तर से मंज़ूरी भी मिल गई है। सुरक्षाबलों को स्थानीय मददगारों और हथियार छुपाने की जगहों को लेकर कई खुफिया सूचनाएं मिली हैं और अब जल्द ही इस पर एक्शन शुरू होगा।
पीएम मोदी अब फिल्म के इस रोमांच को हकीकत में बदलने के मिशन में जुट गई है। #SurgicalStrike की तरह एलओसी पार आतंकियों पर हमले के बाद अब सीमा में घुसे आतंकियों के नेटवर्क को ध्वस्त करने का जिम्मा सरकार ने राष्ट्रीय राइफल्स की विक्टर फोर्स और किलो फोर्स को दिया है।
विक्टर फोर्स के जिम्मे अनंतनाग, पुलवामा और बडगाम आते हैं।और किलो फोर्स के जिम्मे कुपवाड़ा, बारामूला और श्रीनगर में आतंक विरोधी कार्रवाई की कमान है। किलो फोर्स के मुख्यालय पर ही रविवार देर रात आतंकी हमला हुआ था।
इन्हें कहते हैं स्लीपर सेल
आतंकियों का वो दस्ता जो आम लोगों के बीच रहता है और आतंकियों के हैंडलर्स से आदेश मिलने के बाद हरकत में आते हैं। लंबे समय तक आम जिंदगी जीने वाले इन लोगों को सरकार के लिए पकड़ना मुश्किल होता है। किसी मॉल-दुकान में काम करने वाले, छोटी-मोटी नौकरी-बिजनेस करने वाले ये स्लीपर सेल सूचनाएं जुटाने में माहिर होते हैं।
स्लीपर सेल जज्बाती होते हैं जो जान देने से भी नहीं चूकते। देश के बिगड़े माहौल में आतंकी इन्हीं स्लीपर सेल को एक्टिव करके नुकसान पहुंचाने की कोशिश करते हैं।
इसे ख़त्म करने के लिए हुई बैठक
तीनों सेनाओं के प्रमुखों और रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर के साथ एनएसए अजीत डोभाल की हुई बैठक में इसी मुद्दे पर बात हुई। बाद में एनएसए अजीत डोभाल की पीएम मोदी से मुलाकात को भी इसी मुहिम से जोड़कर देखा जा रहा है।
हमले में स्थानीय लोगों ने की मदद
उरी में सेना के बेस कैंप पर हुए हमले में ये बात सामने आई थी कि आतंकी कई दिन से उस इलाके में थे जबकि बारामूला में आतंकी हमलों में भी स्थानीय मदद की बात सामने आई है। इसके बाद ही घाटी में आतंक विरोधी अभियानों को पूरी शिद्दत से शुरू करने और उसके ख़ात्मे के लिए एक बड़ा अभियान चलाए जाने का न सिर्फ़ खाका खींच दिया गया है बल्कि उसे शीर्ष स्तर से मंज़ूरी भी मिल गई है। सुरक्षाबलों को स्थानीय मददगारों और हथियार छुपाने की जगहों को लेकर कई खुफिया सूचनाएं मिली हैं और अब जल्द ही इस पर एक्शन शुरू होगा।

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