नई दिल्ली। आपने कई बार सुना होगा कि किसी आरोपी को फांसी की सजा सुनाई गई है। आप फिल्मों में तो जरूर ही देखे होंगे जज को फांसी की सजा सुनाते हुए। आपने यह भी देखा होगा कि मौत की सजा सुनाने के बाद जज पेन की निब को तोड़ देते हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि क्यों फांसी की सजा सुनाने के बाद जज पेन की निब तोड़ देते हैं। तो चलिए आज हम आपको इसके पीछे का कारण बता ही देते हैं।
नहीं है कोई कानूनी प्रावधान
IPC की धारा 302 में मौत की सजा का प्रावधान है। भारत में यह सज़ा बहुत कम ही दी जाती है। लेकिन, आपको यह जानकर हैरानी होगी कि मौत की सज़ा सुनाने के बाद पेन की निब तोड़ने के पीछे कोई कानूनी प्रावधान नहीं है।
यह एक भावनात्मक निर्णय
मौत की सज़ा सुनाने के बाद पेन की निब तोड़े जाने का कारण सिर्फ इतना है कि जिस पेन से किसी की मौत लिखी गई हो उस पेन का इस्तेमाल दोबारा ना किया जाए। कई जजों का मानना है कि ऐसा भावनात्मक तौर पर भी किया जाता है। जिस पेन से किसी की मौत लिखी गई हो जज भी उस पेन को दोबारा इस्तेमाल करना ठीक नहीं समझते।
नहीं है कोई कानूनी प्रावधान
IPC की धारा 302 में मौत की सजा का प्रावधान है। भारत में यह सज़ा बहुत कम ही दी जाती है। लेकिन, आपको यह जानकर हैरानी होगी कि मौत की सज़ा सुनाने के बाद पेन की निब तोड़ने के पीछे कोई कानूनी प्रावधान नहीं है।
यह एक भावनात्मक निर्णय
मौत की सज़ा सुनाने के बाद पेन की निब तोड़े जाने का कारण सिर्फ इतना है कि जिस पेन से किसी की मौत लिखी गई हो उस पेन का इस्तेमाल दोबारा ना किया जाए। कई जजों का मानना है कि ऐसा भावनात्मक तौर पर भी किया जाता है। जिस पेन से किसी की मौत लिखी गई हो जज भी उस पेन को दोबारा इस्तेमाल करना ठीक नहीं समझते।

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