बीजिंग, प्रेट्र। भारत और जापान के बीच हाल में हुए परमाणु समझौते पर चीन का रुख नरम पड़ा है। विदेश मंत्रालय ने इस पर सधी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच संपन्न करार को मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परमाणु अप्रसार व्यवस्था के अनुकूल होना चाहिए। चीन ने परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण इस्तेमाल करने की भी बात कही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के पीएम शिंजो एबी ने शुक्रवार को ऐतिहासिक करार पर हस्ताक्षर किया था।
चीनी विदेश विभाग के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु अप्रसार दायित्वों को पूरा करने वाले सभी देश परमाणु ऊर्जा का शांतिपूर्ण इस्तेमाल कर सकते हैं। साथ ही ऐसे देशों पर मौजूदा व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने की भी जिम्मेदारी है। भारत, जापान के साथ परमाणु करार करने वाला ऐसा पहला देश बन गया है, जिसने परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर नहीं किया है। एनपीटी का हस्ताक्षरकर्ता राष्ट्र नहीं होने के कारण चीन परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में भारत की सदस्यता का विरोध करता रहा है।
मोदी और शिंजो एबी द्वारा जारी संयुक्त बयान में दक्षिण चीन सागर का भी उल्लेख था। दोनों देशों ने सभी विवादों को संयुक्त राष्ट्र के अधीन शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने पर जोर दिया। शुआंग ने उम्मीद जताई कि क्षेत्र के बाहर के देश विवाद सुलझाने के लिए संबंधित देशों द्वारा किए जा रहे प्रयास का समर्थन करेंगे। मालूम हो कि दक्षिण चीन सागर में अधिकार को लेकर चीन का फिलीपींस, वियतनाम, मलेशिया, बुनेई और ताइवान के साथ विवाद चल रहा है।
चीनी विदेश विभाग के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु अप्रसार दायित्वों को पूरा करने वाले सभी देश परमाणु ऊर्जा का शांतिपूर्ण इस्तेमाल कर सकते हैं। साथ ही ऐसे देशों पर मौजूदा व्यवस्था को प्रभावी बनाए रखने की भी जिम्मेदारी है। भारत, जापान के साथ परमाणु करार करने वाला ऐसा पहला देश बन गया है, जिसने परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) पर हस्ताक्षर नहीं किया है। एनपीटी का हस्ताक्षरकर्ता राष्ट्र नहीं होने के कारण चीन परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में भारत की सदस्यता का विरोध करता रहा है।
मोदी और शिंजो एबी द्वारा जारी संयुक्त बयान में दक्षिण चीन सागर का भी उल्लेख था। दोनों देशों ने सभी विवादों को संयुक्त राष्ट्र के अधीन शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने पर जोर दिया। शुआंग ने उम्मीद जताई कि क्षेत्र के बाहर के देश विवाद सुलझाने के लिए संबंधित देशों द्वारा किए जा रहे प्रयास का समर्थन करेंगे। मालूम हो कि दक्षिण चीन सागर में अधिकार को लेकर चीन का फिलीपींस, वियतनाम, मलेशिया, बुनेई और ताइवान के साथ विवाद चल रहा है।

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