नई दिल्ली- भारतीय सेना ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में 28 सितंबर को चार एमआई 17 हेलिकॉप्टरों की मदद से सर्जिकल स्ट्राइक की थी। इस ऑपरेशन में शामिल स्पेशल फोर्सेज के करीब 60 लोगों को पहुंचाने और लाने का काम इनसे लिया गया। भारत में रूसी दूतावास के फेसबुक पेज पर मौजूद रिपोर्ट्स के अनुसार सबसे पहले दो हेलिकॉप्टर पहुंचे जो टारगेट से ज्यादा दूर नहीं थे।
इन हेलिकॉप्टरो से 30 कमांडो उतरे और टारगेट तक चले गए। दो अन्य हेलिकॉप्टरों ने बाकी जवानों को एलओसी के पास भारतीय सीमा में उतारा। पूरे ऑपरेशन में स्पेशल फोर्सेस,बिहार और डोगरा रेजिमेंटों और वायुसेना के बीच बढ़िया तालमेल रहा। एमआई -17 हेलिकॉप्टर स्पेशल फोर्सेज के पसंदीदा हेलिकॉप्टर रहे हैं। रूस में बने इन हेलिकॉप्टरों का नवंबर 2008 में भी इस्तेमाल किया गया था, जब मुंबई के छबाड हाउस में पाकिस्तानी आतंकवादियों ने यहूदी लोगों को बंधक बना लिया था।
कामोव और अपाचे जैसे दूसरे अटैक हेलिकॉप्टरों के मुकाबले यह मध्यम दर्जे का है। मशीन भी धीमी है, लेकिन कुछ खूबियां इस तरह की हैं जो स्पेशल ऑपरेशन को सूट करती हैं। इसके बड़े डोर से सैनिकों को जल्द और आसानी से चढ़ाना-उतारना संभव है। इसका इंजन ऊंचाई वाले इलाकों में अच्छी तरह काम करता है। नेविगेशन और बर्फ पिघलाने वाले उपकरणों के लगे होने से किसी भी मौसम में हेलिकॉप्टर उड़ान भर सकता है। इसकी ऑपरेशनल रेंज 580 किलोमीटर है, जिससे पेशावर तक जाकर निशाना साधा जा सकता है
इन हेलिकॉप्टरो से 30 कमांडो उतरे और टारगेट तक चले गए। दो अन्य हेलिकॉप्टरों ने बाकी जवानों को एलओसी के पास भारतीय सीमा में उतारा। पूरे ऑपरेशन में स्पेशल फोर्सेस,बिहार और डोगरा रेजिमेंटों और वायुसेना के बीच बढ़िया तालमेल रहा। एमआई -17 हेलिकॉप्टर स्पेशल फोर्सेज के पसंदीदा हेलिकॉप्टर रहे हैं। रूस में बने इन हेलिकॉप्टरों का नवंबर 2008 में भी इस्तेमाल किया गया था, जब मुंबई के छबाड हाउस में पाकिस्तानी आतंकवादियों ने यहूदी लोगों को बंधक बना लिया था।
कामोव और अपाचे जैसे दूसरे अटैक हेलिकॉप्टरों के मुकाबले यह मध्यम दर्जे का है। मशीन भी धीमी है, लेकिन कुछ खूबियां इस तरह की हैं जो स्पेशल ऑपरेशन को सूट करती हैं। इसके बड़े डोर से सैनिकों को जल्द और आसानी से चढ़ाना-उतारना संभव है। इसका इंजन ऊंचाई वाले इलाकों में अच्छी तरह काम करता है। नेविगेशन और बर्फ पिघलाने वाले उपकरणों के लगे होने से किसी भी मौसम में हेलिकॉप्टर उड़ान भर सकता है। इसकी ऑपरेशनल रेंज 580 किलोमीटर है, जिससे पेशावर तक जाकर निशाना साधा जा सकता है

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