वॉशिंगटन.दुनिया में अलग-थलग करने की भारत की स्ट्रैटजी का जवाब देने के लिए पाकिस्तान नए रास्ते खोज रहा है। उड़ी हमले के बाद भारत समेत 5 देशों ने नवंबर में इस्लामाबाद में होने वाली सार्क समिट का बायकाॅट कर दिया था। इसके बाद पाकिस्तान अब भारत के दबदबे वाले 8 देशों के साउथ एशियन एसोसिएशन फॉर रीजनल कोऑपरेशन (सार्क) के मुकाबले चीन के साथ साउथ एशियन इकोनॉमिक अलायंस बनाना चाहता है। इसके लिए पाकिस्तान ने खाका बनाना शुरू कर दिया है।
क्या है पाकिस्तान का आइडिया...
- पाकिस्तान के अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, साउथ एशियन रीजन में इस नए फ्रंट को खड़ा करने की तैयारियों का खुलासा न्यूयॉर्क में मौजूद पाकिस्तान के पार्लियामेंट्री डेलिगेशन ने किया।
- पाकिस्तानी सांसद मुशाहिद हुसैन सैयद ने कहा- “दुनिया में साउथ एशिया उभर रहा है। इसमें चीन, ईरान और आसपास के पडोसी देश शामिल हैं। ऐसे में सभी देशों को साथ लाया जा सकता है।"
- पाक के एक अन्य डिप्लोमैट ने बताया, 'ये प्लानिंग पाक को दुनिया से अलग-थलग करने की भारत की स्ट्रैटजी को काउंटर करने के लिए है। इससे नवाज सरकार को काफी मदद मिलने की उम्मीद है। '
क्या तर्क दे रहा है पाकिस्तान
- हुसैन ने बताया- "चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर साउथ एशिया को सेंट्रल एशिया के साथ जोड़ने का अहम रूट है। ग्वादर पोर्ट इसमें अहम रोल निभा सकता है। हम चाहते हैं कि भारत भी इसे ज्वाइन करे।''
- भारत के एक अफसर ने इस ऑफर को नामंजूर कर दिया। वे सार्क से मिलने वाले फायदे के साथ रहना चाहते हैं।
ऐसा क्यों कर रहा है पाकिस्तान
- उड़ी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान को दुनिया में अलग-थलग करने की स्ट्रैटजी अपनाई थी। इसमें भारत को कामयाबी भी मिली थी।
- यूएन में दुनिया के बड़े देश यूएस, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन और रूस ने इस हमले की निंदा की थी।
- इस्लामाबाद में 15 और 16 नवंबर में होने वाले सार्क सम्मेलन में भारत ने शामिल न होने से मना कर दिया था।
- इसके बाद, आठ मेंबर्स वाले सार्क संगठन के पांच देशों ने भी इसमें शामिल न होने का फैसला किया था। इसमें भारत, अफगानिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका और भूटान शामिल थे।
भारत के बढ़ते कद से चीन भी परेशान
- वॉशिंगटन में मौजूद डिप्लोमैटिक ऑब्जर्वर्स ने कहा- "प्रपोज्ड अरेंजमेंट चीन के फेवर में है। चीन भी साउथ एशिया रीजन में भारत के बढ़ते प्रभाव से परेशान और चिंतित है। "
- "पाकिस्तानी सांसदों का मानना है कि इस फोरम को बनाने में चीन अहम रोल निभा सकता है। खासकर ईरान और सेंट्रल एशिया के देशों को इससे जोड़ने में।"
- उधर, पाक को सार्क देशों को लेकर एक चिंता भी है। उसका मानना है कि ये देश इस फोरम को लेकर कम इंटरेस्ट दिखा सकते हैं। क्योंकि, बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका को इस रूट से ज्यादा फायदा नहीं होगा।
- वहीं, सेंट्रल एशिया के कई देशों के साथ भारत के अच्छे रिलेशन हैं। जिसमें ईरान भी शामिल है।
क्या है पाकिस्तान का आइडिया...
- पाकिस्तान के अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, साउथ एशियन रीजन में इस नए फ्रंट को खड़ा करने की तैयारियों का खुलासा न्यूयॉर्क में मौजूद पाकिस्तान के पार्लियामेंट्री डेलिगेशन ने किया।
- पाकिस्तानी सांसद मुशाहिद हुसैन सैयद ने कहा- “दुनिया में साउथ एशिया उभर रहा है। इसमें चीन, ईरान और आसपास के पडोसी देश शामिल हैं। ऐसे में सभी देशों को साथ लाया जा सकता है।"
- पाक के एक अन्य डिप्लोमैट ने बताया, 'ये प्लानिंग पाक को दुनिया से अलग-थलग करने की भारत की स्ट्रैटजी को काउंटर करने के लिए है। इससे नवाज सरकार को काफी मदद मिलने की उम्मीद है। '
क्या तर्क दे रहा है पाकिस्तान
- हुसैन ने बताया- "चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर साउथ एशिया को सेंट्रल एशिया के साथ जोड़ने का अहम रूट है। ग्वादर पोर्ट इसमें अहम रोल निभा सकता है। हम चाहते हैं कि भारत भी इसे ज्वाइन करे।''
- भारत के एक अफसर ने इस ऑफर को नामंजूर कर दिया। वे सार्क से मिलने वाले फायदे के साथ रहना चाहते हैं।
ऐसा क्यों कर रहा है पाकिस्तान
- उड़ी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान को दुनिया में अलग-थलग करने की स्ट्रैटजी अपनाई थी। इसमें भारत को कामयाबी भी मिली थी।
- यूएन में दुनिया के बड़े देश यूएस, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन और रूस ने इस हमले की निंदा की थी।
- इस्लामाबाद में 15 और 16 नवंबर में होने वाले सार्क सम्मेलन में भारत ने शामिल न होने से मना कर दिया था।
- इसके बाद, आठ मेंबर्स वाले सार्क संगठन के पांच देशों ने भी इसमें शामिल न होने का फैसला किया था। इसमें भारत, अफगानिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका और भूटान शामिल थे।
भारत के बढ़ते कद से चीन भी परेशान
- वॉशिंगटन में मौजूद डिप्लोमैटिक ऑब्जर्वर्स ने कहा- "प्रपोज्ड अरेंजमेंट चीन के फेवर में है। चीन भी साउथ एशिया रीजन में भारत के बढ़ते प्रभाव से परेशान और चिंतित है। "
- "पाकिस्तानी सांसदों का मानना है कि इस फोरम को बनाने में चीन अहम रोल निभा सकता है। खासकर ईरान और सेंट्रल एशिया के देशों को इससे जोड़ने में।"
- उधर, पाक को सार्क देशों को लेकर एक चिंता भी है। उसका मानना है कि ये देश इस फोरम को लेकर कम इंटरेस्ट दिखा सकते हैं। क्योंकि, बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका को इस रूट से ज्यादा फायदा नहीं होगा।
- वहीं, सेंट्रल एशिया के कई देशों के साथ भारत के अच्छे रिलेशन हैं। जिसमें ईरान भी शामिल है।

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